आसमान गिरा ( एक लोककथा )
अनुमान और कल्पना :-
उत्तर:- अगर वही आवाज़ हाथी ने सुनी होती, तो वह उतना नहीं घबराता जितना खरगोश घबराया। यह हमें यह सिखाता है कि डर का स्तर केवल परिस्थिति पर नहीं, बल्कि व्यक्ति (या प्राणी) के स्वभाव और सोचने की क्षमता पर भी निर्भर करता है।
3. यदि खरगोश के स्थान पर कौआ चौंक जाता और उड़ने लगता तो उसे रास्ते में कौन-कौन मिलता और उससे क्या -क्या पूछता? कल्पना कीजिए और एक कहानी सुनाइए।
उत्तर:- एक दिन जंगल में हलचल मच गई। खरगोश की जगह इस बार कौआ चौंक गया! किसी ने अचानक ज़ोर से ताली बजाई और कौआ फड़फड़ाता हुआ आसमान की ओर उड़ चला।
जैसे ही कौआ आम के पेड़ के पास पहुँचा, वहाँ बैठी तोता रानी ने पूछा:
“कौए भैया, इतनी जल्दी में कहाँ जा रहे हो? कोई शादी में बुलावा आया है क्या?”
कौआ बोला, “नहीं तो! मैं तो बस डर गया था। अब सोच रहा हूँ कि थोड़ा घूम ही लूं।
तालाब के पास बगुला जी ध्यानमग्न मुद्रा में खड़े थे। कौए को देखकर बोले:
“कौए, क्या तुम भी ध्यान लगाने आए हो?”
कौआ हँसते हुए बोला, “ध्यान तो नहीं, लेकिन डर के बाद थोड़ा सुकून ज़रूरी है।
कभी-कभी ज़िंदगी में डर हमें ऐसे रास्तों पर ले जाता है जहाँ हम खुद को नए रूप में पहचानते हैं। कौए की उड़ान डर से शुरू हुई, लेकिन अंत में वह एक खोज बन गई।
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