ओणम के रंग
| ओणम के रंग -ppt |
|
|
|
|
|
यह चित्र ओणम के त्योहार पर आयोजित नौका-दौड़ का है। केरल राज्य का एक स्थान है ‘आरन्मुला’। ओणम के त्योहार पर यहाँ नौका-दौड़ आयाेजित की जाती है। नावों की इस प्रतियोगिता को देखने के लिए हजारों लोग एकत्रित होकर आनंद लेते हैं। नौका-दौड़ के साथ-साथ ओणम के और भी बहुत से आकर्षण हैं। तो आइए, ओणम के रंगों का आनंद लेते हैं।
“रंग-बिरंगे फूल चुनें हम,
रंग-बिरंगे फूल चुनें।”
सुबह-सुबह बच्चे नहा-धोकर हाथ में टोकरी लिए लाल, पीले, सफेद फूल तोड़ने के लि ए बाग-बगीचों में नि कल पड़े। सूर्योदय होते ही बच्चों ने अपने-अपने घर के आँगन को गो बर से लीपा और फि र आँगन में पूक्कलम (फूलों की रंगाेली) बनाए। इसी के साथ केरल में ओणम का त्योहार शुरू हो गया।
वर्षा के बादल छँटते ही ठंडी-ठंडी तेज हवाएँ थम जाती हैं और केरल का प्राकृति क सौंदर्य नि खर उठता है। पूर्व दि शा में सह्य पर्व त के पीछे से जब सूरज निकलता है तो पश्चिमी तट पर समुद्र की लहरें चमकने लगती हैं और समुद्र-तट की रेत के कण दमकने लगते हैं। हल्की -हल्की बयार के झोंकों से नारियल के पेड़ों के पत्ते लहलहाने लगते हैं। नदी का निर्मल और स्वच्छ जल वातावरण को संदुर बना देता है। तरह-तरह के चहचहाते पक्षी, आसमान में उड़ते हुए अठखेलियाँ करते हैं। रंग-बि रंगी तितलियाँ खिले फूलों पर मँडराती दिखाई देती हैं। ऐसा लगता है मानो प्रकृति केरलवासि यों के महोत्सव ओणम के स्वाग त की पूरी तैयारी कर चुकी है। किसान उपज काट चुके हैं और खलिहानों में धान भरे हैं।
कहा जाता है कि ओणम का त्योहार एक पौराणिक कथा पर आधारित है। प्राचीन काल में महाबली नाम के एक राजा थे जो केरल पर शासन करते थे। उनका राज्य पृथ्वी , स्वर्ग और पाताल लोक तक फैला हुआ था। महाबली के राज में लोग पूरी तरह प्रसन्न थे।
एक दिन महाविष्णु, वामन का रूप धारण करके राजा महाबली के पास पहुँचे और तीन पग भूमि की याचना की। महाबली ने इस तुच्छ दान की तुरंत स्वीकृति दे दी। महाविष्णु तत्काल अपना वामन रूप त्याग दिया और त्रिविक्रम बनकर ब्रह्माण्ड तक फ़ैल गए। उन्होंने दो पगों से स्वर्ग , भूमि और पाताल को नाप लिया और उनके तीसरा पग रखने के लिए कोई जगह शेष नहीं बची। इस पर उन्होंने महाबली की ओर प्रश्नात्म क दृिष्ट से देखा तो महाबली ने महाविष्णु का तीसरा पग रखने के लिए अपना सिर झुका दिया।
निम्न प्रश्नों के उत्तर दें :-
1. ओणम त्योहार की शुरुआत कैसे होती है ?
2. महाबली कौन थे?
3. महाबली का शासन कहाँ तक फैला हुआ था?
4. महाबली के सामने कौन आये?
5. तीन पग भूमि की याचना किसने किया ?
6. दो पगों में कहाँ तक फ़ैल गए?
7. विष्णु के अवतार का नाम लिखें?
8. विष्णु ने कौन सा अवतार धारण कर दो पगों में स्वर्ग , भूमि और पाताल को नाप लिया ?
प्रश्न-1 ओणम के भोज में कौन-कौन से भोज्य पदार्थ बनाए जाते हैं? किसी एक भोज्य पदार्थ के बारे में विस्तार से लिखिए?
उत्तर:- ओणम के पर्व पर पारंपरिक भोज को ओणम सध्या कहा जाता है, जो एक शुद्ध शाकाहारी भोज होता है और केले के पत्ते पर परोसा जाता है। इसमें लगभग 20 से अधिक प्रकार के व्यंजन शामिल होते हैं, जो स्वाद, रंग और पोषण से भरपूर होते हैं.
🌿 ओणम सध्या में बनने वाले प्रमुख भोज्य पदार्थ
- सांबर – सब्जियों से बना मसालेदार दाल आधारित व्यंजन
- अवियल – नारियल और दही से बनी मिली-जुली सब्जियों की सब्ज़ी
- थोरन – कद्दूकस की गई सब्जी (जैसे गोभी या बीन्स) को नारियल के साथ भूनकर बनाया जाता है
- ओलन – सफेद कद्दू और नारियल दूध से बना हल्का व्यंजन
- पचड़ी / खिचड़ी – दही और नारियल से बनी मीठी या खट्टी चटनी
- इनजी पचड़ी – अदरक से बनी तीखी चटनी
- पुलिशेरी – दही आधारित करी
- कूट्टु करी – केले और चने से बना गाढ़ा व्यंजन
- पापड़म – कुरकुरे पापड़
- चोरू – उबला हुआ चावल
- पायसम – दूध, चावल या चने से बनी मिठाई
🍲 अवियल: एक विशेष व्यंजन का विस्तृत विवरण
अवियल ओणम सध्या का एक अत्यंत लोकप्रिय और पारंपरिक व्यंजन है। यह स्वाद, पोषण और रंगों का सुंदर मिश्रण होता है।
🔸 सामग्री:
- मिश्रित सब्जियाँ: गाजर, कद्दू, आलू, सेम, कच्चा केला, बैंगन आदि
- ताज़ा नारियल
- दही
- करी पत्ता
- नारियल तेल
- हल्दी, नमक, हरी मिर्च
🔸 विधि:
- सब्जियों को लंबाई में काटकर हल्दी और नमक के साथ उबालें।
- ताज़ा नारियल, हरी मिर्च और थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं।
- उबली सब्जियों में यह पेस्ट मिलाएं और धीमी आँच पर पकाएँ।
- अंत में दही और नारियल तेल डालें, करी पत्ता से तड़का लगाएँ।
प्रश्न :-2 आपके राज्य में कौन-से त्योहार वि शेष रूप से मनाए जाते हैं? उन त्योहारों की कौन-सी बातें ओणम से मिलती-जुलती हैं?
उत्तर:-
🌞 छठ पूजा और ओणम की समानताएँ
छठ पूजा बिहार का सबसे विशिष्ट पर्व है, जिसमें लोग सूर्य देव को जल में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं। यह पर्व प्रकृति, जल, सूर्य और शुद्धता से जुड़ा होता है।
ओणम भी एक कृषि पर्व है, जिसमें राजा महाबली की स्मृति में लोग प्रकृति और समृद्धि का उत्सव मनाते हैं।
✨ समान पहलू:
- प्रकृति की पूजा: ओणम में फूलों की सजावट (पुक्कलम), छठ में सूर्य और जल की आराधना
- सामूहिकता: दोनों पर्वों में पूरा समुदाय एक साथ भाग लेता है
- शुद्धता और व्रत: छठ में कठिन व्रत, ओणम में सत्विक भोजन
- लोकनृत्य और गीत: ओणम में कथकली, छठ में लोकगीत और सामूहिक गायन
- परिवार और परंपरा: दोनों पर्वों में पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान
प्रश्न :-4 पाठ में आए कि स उल्लेख के आधार पर कहा जा सकता है कि महाबली अपनी प्रजा से बहुत ही प्रेम करते थे?
उत्तर:-
महाबली एक आदर्श, उदार और प्रजा-प्रिय राजा थे, जिनका प्रेम उनकी प्रजा के प्रति गहरा और सच्चा था.
- प्रजा की भलाई को प्राथमिकता: उन्होंने कभी भी अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया। उनके राज्य में सभी सुखी और संतुष्ट थे, जो एक प्रेमपूर्ण और जिम्मेदार शासक की पहचान है।
- वामन को दान देना: जब वामन ने तीन पग भूमि माँगी, तो महाबली ने बिना किसी संकोच के उसे देने का निर्णय लिया। यह उनकी उदारता और दूसरों की आवश्यकता को समझने की क्षमता को दर्शाता है।
- प्रजा की समृद्धि: पाठ में बताया गया है कि महाबली के राज्य में कोई दुखी नहीं था। यह इस बात का संकेत है कि उन्होंने अपनी प्रजा की सुख-सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा।
प्रश्न :-5 पाठ में आई कि न बातों से पता चलता है कि प्रकृति भी ओणम के स्वागत की तैयारी कर रही है?
- हरियाली का वर्णन: पाठ में बताया गया है कि खेतों में हरियाली छा गई है, जो दर्शाता है कि प्रकृति भी उत्सव के रंग में रंगी हुई है।
- फूलों की बहार: जगह-जगह फूल खिले हुए हैं, जिससे वातावरण में सुंदरता और ताजगी आ गई है — यह ओणम के स्वागत का प्राकृतिक संकेत है।
- मौसम का सौंदर्य: मौसम सुहावना हो गया है, आकाश साफ है और वातावरण में उत्सव की खुशबू है।
- पक्षियों की चहचहाहट: पक्षी भी आनंदित होकर चहचहा रहे हैं, मानो वे भी ओणम के आगमन की खुशी मना रहे हों












Comments
Post a Comment